मित्र राष्ट्रों की विजय एवं द्वितीय विश्वयुद्ध का अन्त --

इटली पर जीत --  इटली की सेना द्वितीय विश्वयुद्ध में एक दुर्लभ सेना साबित हुई। .इटली की जनता में मुसोलिनी के विरुद्ध असन्तोष बढ़ने लगा। 28 अगस्त 1944 को मुसोलिनी को बन्दी बना लिया गया। इटली की तत्कालीन सरकार सन्धि  को तैयार थी , जर्मन सेनाओं के आगमन के कारण मित्र राष्ट्रों को भीषण युद्ध करना पड़ा। अन्ततः 4 जून 1944 को रोम पर मित्र राष्ट्रों का कब्जा हो गया। इस प्रकार इटली से फासीवादी ताकतों का अंत हो गया।

जर्मनी की पराजय -- मित्र राष्ट्रों ने इटली पर अधिकार करने के बाद जर्मनी के विभिन्न प्रदेशों पर वमवर्षा शुरू कर दी। 25 अगस्त 1944 को मित्र राष्ट्रों ने फ्रांस को जर्मनी से मुक्त करवा लिया।  इसके बाद मित्र राष्ट्रों ने बेल्जियम , ब्रुसेल्स तथा हालेण्ड पर आक्रमण कर दिया। अब जर्मनी को घेरने का प्रयास किया लेन लगा। उत्तर की ओर से इग्लैण्ड , मध्य में अमेरिका तथा दक्षिण में फ्रांसीसी सेनाओं ने तथा पूर्व की ओर से रूस ने घेर लिया। इस प्रकार जर्मनी चारों ओर से शत्रुओं से घिर गया। जर्मनी ने मित्र राष्ट्रों एवं रूस के सामने 7 मई , 1945 को घुटने टेक दिए। इसके साथ ही जर्मनी का पूर्णतया पतन हो गया।

जापान की पराजय -- जर्मनी की पराजय के पश्चात मित्रर राष्ट्रों का ध्यान जापान को पराजित करने की ओर गया। ब्रिटिश सेनाओं ने बर्मा पर आक्रमण कर उसे जापान के नियंत्रण से मुक्त करवा लिया। इसके पश्चात मलाया को मुक्त कराया गया।

फिलीपीन्स पर अमेरिकी सेनाओं ने अधिकार क्र लिया तथा सिंगापूर पर भी अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हो गया। अमेरीकी जनरल मैक ऑर्थर के नेतृत्व में अमेरिका , न्यूजीलेण्ड व् आस्ट्रेलिया की संयुक्त सेनाओं ने तीव्र वेग से जापान के बन्दरगाहों पर आक्रमण कर उन्हें ध्वस्त कर दिया। चीनी सेनाओं ने भी अपने प्रदेशों से जापानियों को निकलना प्रारम्भ कर दिया इन सब के बीच 26 जुलाई 1945 को पोट्सडम सम्मेलन में मित्र राष्ट्रों ने जापान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मॉँग की , परन्तु जापान ने इस शर्त पर ध्यान न देते हुए युद्ध जारी रखा।

इसकी प्रतिक्रिया में 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के समृद्ध नगर हिरोशिमा पर लिटिल ब्वॉय नामक परमाणु बम गिराया। हिरोशिमा तबाह हो गया। उधर रूस ने भी जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी , लेकिन जापान फिर भी नहीं झुका। फल्श्वरूप अमेरिका ने 9 अगस्त 1945 को एक और परमाणु बम जिसका नाम फैटमेन था , नागासाकी पर गिराया। इसके पश्चात हुई तबाही से जापान आत्मसमर्पण को बाध्य हो गया 14 अगस्त 1945 को जापान के आत्मसमर्पण के साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया।













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