औद्योगिक विकास की समस्याऐ --
औद्योगिक विकास की समस्याऐ --
पूँजी तथा वित्तीय संस्थाओं का आभाव -- औद्योगिक विकास के लिए पूँजी की काफी बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। इसके लिए सस्ती एवं सरल वित्तीय सहायता संस्थाओं की आवश्यकता होती है। यद्यपि इस क्षेत्र में सरकार द्वारा प्रयास किए जा रहे है। परन्तु अभी भी यह समस्या बनी हुई है।
संरचनात्मक एवं ऊर्जा संसाधनों का आभाव -- औद्योगिक विकास के लिए सड़क , बिजली , पानी आदि मूलभूत सुविधा अनिवार्य होती है , लेकिन भारत में इन सुविधाओं का आभाव दिखाई पड़ता है। जहाँ संरचनात्मक सुविधाएँ बेहतर है , वहाँ औद्योगिक विकास का स्तर भी अपेक्षाकृत ऊँचा है।
कुशल कर्मचारियों की कमी -- गुणवत्तायुक्त शिक्षा की अनुपलब्धता , व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा की कमी , प्रशिक्षण व्यवस्था का आभाव आदि के कारण औद्योगिक विकास में समस्या आती है।
आधारभूत उद्योगों की कमी -- स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर वर्तमान समय तक भारत आधारभूत उद्योग जैसे - लौह - अयस्क उद्योग , एल्युमिनियम उद्योग , भारी मशीनरी उद्योग आदि की कमी से जूझता रहा है। इसका प्रभाव औद्योगिक विकास पर पड़ा है।
अनियोजित विकास -- भारत में अधिकांश सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों की स्थापना ऐसे स्थान पर की गई , जो लागत लाभ के अनुकूल नहीं है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में अनियोजित तरीके से उद्योग का संकेन्द्रण कुछ ही महानगरों तक सीमित हुआ है।
अनुसन्धान एवं नवाचार की कमी -- औद्योगिक क्षेत्र में अनुसन्धान कम होने तथा नवाचार को मक अपनाने से औद्योगिक विकास प्रभावित होता है। नवाचार एवं अनुसन्धान कमी का मूल कारण धन की कमी तथा सरकार की इच्छशक्ति का आभाव है।
प्रबन्धकीय एवं तकनीक समस्या -- कुशल प्रबन्धन तथा आधुनिकक तकनीक औद्योगिक विकास के अनिवार्य तत्त्व है। इनसे न केवल उद्योग का सुचारु संचालन होता है , अपितु गुणवत्तायुक्त लागत तथा प्रभावी वस्तुओं का निर्माण भी सम्भव होता है , लेकिन भारतीय स्थिति में उपयुक्त दोनों ही तत्वों की उपलब्धता अपर्याप्त है , जिसका प्रभाव औद्योगिक विकास पर पड़ता है।
कच्चे माल की कमी -- उद्योगों के लिए कच्चा माल मूलभूत आवश्यकता है , जिस पर पूरी उत्पादन प्रक्रिया आधारित है , लेकिन भारत में कच्चे माल की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होने से उद्योगों को समस्या होती है।
प्रशासनिक जटिलता एवं लालफीताशाही -- सरकार नियम तथा विनियम औद्योगिक विकास में समस्या पैदा करते है। नियमो तथा विनियमों के आधार पर अधिकारीयों द्वारा औद्योगिक प्रक्रिया को विलम्बित किया जाता है। इस प्रकार के लालफीताशाही से औद्योगिक विकास प्रभावित होता है।
राजनितिक हस्तक्षेप -- कई बार पर्यावरण , भूमि अधिग्रहण , सामाजिक प्रभाव आदि के भने राजनितिक दल औद्योगिक विकास के माहौल को खराब करने की कोशिश करते है।
सरकारी नीति -- सामान्यतः सरकारी निती आद्योगिक विकास के पक्ष में होती है , लेकिन कई बार इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। उद्योगों से संबन्धित सामाजिक नीति तथा कर से संबन्धित नीतियों का उद्योग द्वारा विरोध किया जाता है।
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