Banjar Bhumi, बंजर भूमि क्यों बन रही है सर दर्द
बंजर भूमि क्यों बन रही है किसानो का सर दर्द
यू तो भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन बंजर भूमि भारत के किसान के लिए एक बड़ी समस्या होती जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण जमीन पर रसायन का उपयोग करना है । रसायन के प्रयोग से फसल तो अच्छी होती है मगर वही रसायन धरती को बंजर बनते है। रसायनो का प्रयोग जमीन को तो बंजर बनता ही है, साथ ही मानव शरीर के लिए बहुत हानिकारक है। अगर जल्द ही रसायनो का प्रयोग नहीं रोका तो ये मनव शरीर व जमीन दोनों को ही गंभीर बीमार कर सकता है। रसायनो का उपयोग होने की सबसे बड़ी बजह है कि किसान को रसायन के बारे में प्रचुर मात्रा में ज्ञान न होना। बहुत से किसान इस बारे में जगरूप होरहे हे पर वह जितनी मात्र में होने चाहिए उस से बहुत कम है। किसान ही नही इस विषय में समाज के सभी वर्ग के लोगो को जगरूप होना जरूरी हे।
भूमि उपयोग
भूमि उपयोग से तातपर्य भूमि संसाधन के विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयोग करना है। भूमि संसाधन के अंतर्गत कृषि योग्य भूमि ,चरागाह ,बंजर ,परती ,वन भूमि को शामिल किया जाता है। भूमि का उपयोग कृषि के अतिरिक्त खनन ,परिवहन ,पशुपालन ,व्यापार -संचार तथा उद्योगों के लिए भी किया जाता है। भारत में भूमि का क्षेत्रफल 32.8 करोड़ हेक्टेयर है।, जिसमें 14 %पर कृषि की जाती है। भूमि संसाधन भारतीय संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। इस पर ही सर्वाधिक जनसंख्या के भरण -पोषण की जिम्मेदारी है।
भारत में भूमि उपयोग -
भारत मेंकुल भूमि का क्षेत्रफल ३२,८७,२६३ हजार हेक्टेयर है, जिसमें से 92. २%भूमि का उपयोग किया जाता है।
कृषि योग्य भूमि -भारत में अति प्राचीन काल से ही कृषि की जाती है। ८००० वर्ष पूर्व देश में १४ हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर कृषि कार्य प्रारम्भ किया गया था। जो वर्ष १९९३ -९४तक १,८६,४२० हजार हेक्टेयर तक पहुँच चुका था। इस प्रकार देश की ५७%भूमि लगभग कृषि योग्य भूमि के अंतर्गत आ चुकी है। यह विशव का सर्वाधिक कृषि योग्य भूमि का उदाहरण है।
वन भूमि -
हमारे देश में वन भूमि में लगातार कमी हो रही है। वर्तमान में लगभग २१%भू -भाग पर ही वन बचे हैं । जबकि राष्ट्रिय स्तर पर वन भूमि का लक्ष्य ३३%निशिचत किया गया है। भारत में भूमि का वितरण भी आसमान है। पर्वतीय प्रदेश तथा तटीय भागों में अतिरिक्त पठारी व मैदानी क्षेत्रों में यह १०%से कम है।
३ कृषि के लिए अनुपलब्ध भूमि -इस क्षेणी बहुत प्रकार की भूमि शामिल की जाती है
चरागाह भूमि -
हरी घास का ऐसा विस्तृत क्षेत्र ,जिस पर पशुओं को चराया जाता है ,चरागाह भूमि कहलाती है।स्थायी चरागाह यह वह भूमि है ,जिस पर अधिकतर ग्राम पंचायतों वसरकार का स्वामित्व होता है। स्थायी चरागाहों में सबसे अधिक भूमि (२३%) हिमाचल प्रदेश में है।
बंजर भूमि -
जिस भूमि पर कोई कृषि उपज नहीं होती ,वह बंजर भूमि कहलाती है। यहाँ पर केवल झाड़ियाँ व घासें उगती है। भूमि के बंजर होने के कुछ कारणों में वनों का कटान ,अत्यधिक नहरी सिंचाई ,औद्योगिक अपशिष्टों का जमाव आदि है। देश की २४%भूमि बंजर है ,जिसके अन्तर्गत पर्वतीय ,पठारी व मरुस्थलीय भूमि आती है।
परती भूमि -
परती भूमि में प्रत्येक वर्ष खेती नहीं होती है। इस प्रकार की भूमि पर दो या तीन वर्षो में एक बार ही फसल उगाई जाती है। यह सीमान्त भूमि है, जिसे उर्वकता बढ़ाने के लिए खाली छोड़ दिया जाता है। वर्तमान में लगभग 7 % भूमि ऐसी है।
शुद्ध बोया गया छेत्र
1 इस भूमि पर फसल उगाई तथा कटी जाती है
2 यदि एक वर्ष में एक बार से अधिक बोया गया छेत्र , शुद्ध बोये गए छेत्र में जोड़ा जाता है। तो उसे सकल कृषि छेत्र कहते है।
भारत में भूमि सुधार
भूमि सुधर से तातपर्य बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की प्रक्रिया है। इस की आवस्यकता इस लिए पड़ती है - क्यों की अनेक कारणों से भूमि की उर्वरा शक्ति का ह्रास हो जाता है। जिस कारण धीरे धीरे बंजर हो जाती है। इसके आवश्यक उर्वर तत्व नष्ट हो जाते है। ऐसे में इस प्रकार की भूमि को पुनः उपजाऊ बनाने की आवश्यकता होती है।
भूमि सुधार के उपाय
बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना।
वृछ एवं बनस्पति रहित भूमि में वनी करण करना।
मृदा की pH छमता को सही करना अर्थात इसके तजवी पन अथवा खारे पन को कम करना।
भूमि में जैव रसायन तत्वों के संतुलन को सही करना।
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