भारत में योजना से संबन्धित संस्थाएँ --

योजना आयोग --

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अर्थव्यवस्था को सुनिश्चित दिशा प्रदान करने के लिए नियोजित प्रयास की आवश्यकता महसूस की गई। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए मंत्रिमण्डल के एक प्र्ताव के माध्यम से 15 मार्च , 1950 को योजना आयोग की स्थापना हुई। योजना आयोग एक गैर - वैधानिक निकाय था , जिसका पदेन अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता था। देश के विकास के लिए आर्थिक लक्षयों तथा प्राथमिकताओं को निर्धारित करने वाले योजना आयोग का अस्तित्व वर्ष 2015 में समाप्त हो गया। वर्तमान में योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को की गई।

योजना आयोग के कार्य --

पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण -- योजना आयोग का सबसे प्रमुख कार्य देश के आर्थिक विकास हेतु पंचवर्षीय योजना का निर्माण करता है। योजना आयोग ही पंचवर्षीय योजना का प्रारूप बनाता है तथा उसे राष्ट्रिय विकास परिषद द्वारा स्वीकृत किया जाता है।

देश के संसाधनों का आकलन -- योजना आयोग देश के भौतिक तथा अभौतिक संसाधनों का आकलन करता है जिससे कि उनके उचित दोहन हेतु नियोजन किया जा सके

योजनाओं का संचालन एवं मूल्यांकन -- योजना आयोग पंचवर्षीय योजनाओं के संचालन दायित्व का निर्वहन करता है तथा योजना की समाप्ति पर उनका मूल्यांकन करता है।

योजना हेतु प्रशासन तंत्र की रुपरेखा -- योजना आयोग योजना लागू करने के लिए प्रशासनिक तंत्र की रुपरेखा को भी निर्धारित करता है।

योजना आयोग की स्थापना के कारण --

नियोजन प्रक्रिया के सुचारु संचालन हेतु -- स्वतंत्रता के पश्चात भारत के नीति - निर्माताओं ने देश के विकास के लिए नियोजित अर्थव्यवस्था का मॉडल अपनाया। इस नियोजित अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए एक केन्द्रीय नियोजन संस्था की आवश्यकता थी ,जिसके लिए योजना आयोग की स्थापना की गई।

उपलब्ध संसाधनों के आकलन एवं नियोजन हेतु -- देश में आर्थिक विकास के लिए कौन - से संसाधन उपलब्ध है त्त इनका उपयोग अर्थव्यवस्था के लिए किया जाए तथा पंचवर्षीय योजना में किस क्षेत्र को प्राथमिकता देनी है आदि निर्णय लेने के लिए योजना आयोग की स्थापना की गई।

नीति आयोग --

नीति आयोग अर्थात राष्ट्रिय भारत परिवर्तन संस्थान की स्थापना 1 जनवरी 2015 को मंत्रिमण्डलीय प्रस्ताव पर की गई। योजना आयोग के स्थान पर गठित नीति आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त एक पूर्णकालिक उपाध्यक्ष होता है। इसके अतिरिक्त कुछ पूर्णकालिक एवं अंशकालिक सदस्य होते है। प्रधानमंत्री द्वारा निर्मित 4 पदेन सदस्य भी आयोग के भाग होते है। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल में राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केंद्रशासित प्रदेशो के प्रशासन शामिल होते है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी होता है ,जो भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी होता है।

नीति आयोग के उद्देश्य एवं कार्य --

राज्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं , क्षेर्तो और रणनीतियो पर एक संयुक्त दृष्टिकोण बनाएगा।
राज्यों के साथ मिलकर आधारभूत संरचनात्मक सहयोग एवं संघवाद को बढ़ावा देना नीति आयोग का उद्देश्य है।ग्राम स्तर से केंद्रीय स्तर तक विश्वसनीय योजना तैयार करेगा।
समाज के वंचित वर्गों के उत्पादन के लिए विशेष प्रयास करेगा।
संसाधनों की पहचान करने के अतिरिक्त कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर निगरानी रखेगा।
कार्यक्रम एवं नीतियों के क्रियान्वयन के लिए तकनीकी सुधार एव क्षमता विकास पर जोर देना , नीति आयोग के उद्देश्यों में शामिल है।

राष्ट्रिय विकास परिषद --

आर्थिक नियोजन अथवा पंचवर्षीय योजना के सन्दर्भ में राज्यों तथा योजना आयोग के मध्य सहयोग एवं समन्वय स्थापित करने के लिए राष्ट्रिय विकास परिषद की सत्तापना 6 अगस्त 1952 को की गई थी। राष्ट्रीय विकास परिषद की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करता था तथा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय केविनेट मंत्री इसके सदस्य होते थे। योजना आयोग के विघटन होने के बाद राष्ट्रीय विकास परिषद का अस्तित्व समाप्त हो गया है।




























Comments

Popular posts from this blog

Water Crisis - जल संकट से जूझता मानव

जल प्रवाह प्रणाली

Banjar Bhumi, बंजर भूमि क्यों बन रही है सर दर्द