कृषि श्रमिकों की दिशा

कृषि श्रमिकों की दिशा सुधारने हेतु सरकार द्वारा किए गए प्रयास --


     अतिरिक्त भूमि का भूमिहीन में वितरण -- हदबन्दी द्वारा बची अतिरिक्त भूमि को कृषि श्रमिकों में बांटा गया है तथा अन्य बेकार भूमि को भी उपजाऊ बनाकर श्रमिकों में उसका वितरण किया गया है। 

    न्यूनतम मजदूरी का नियमन -- न्यूनतम मजदूरी अधिनियम , 1948 के अंतर्गत कृषि श्रमिकों को मिलाने वाली मजदूरी की सिमा निर्धारित कर दी गयी है। इस अधिनियम को कृषि पर भी लागू कर दिया गया है।

   श्रम शकारिकताओं का गठन -- सरकार द्वारा श्रम शहकरिताओ का गठन किया गया है। जो सड़क निर्माण नहरों व् तलवों की खुदाई का ठेका लेतीं है , जिससे श्रमिकों को रोजगार मिलता है। 

   भू - स्वामित्व विवस्था में सुधार -- श्रमिकों के हित के लिए अनेक राज्यों में कानून बनाए गए हैं। 

   आवासीय सुबिधा की उपलब्धता -- सरकार द्वारा भूमि हीन श्रमिकों को मकान के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी गई  है जैसे - इन्द्रा आवास योजना , जिससे उनकी आवास समस्या का समाधान हो सके। 

   बधुंआ श्रम प्रतिबन्ध -- बंधुआ श्रम से  निजात दिलाने के लिए वर्ष 1976 में बंधुआ श्रम उन्मूलन अधिनियम पारित किया गया है। 

   एकीकृत ग्रामीण विकास -- इस कार्यक्रम के अन्तर्गत छोटे कृषक विकास एजेंसी , सूखी भूमि कृषि विकास कार्यक्रम आते है जिसे वर्ष 2000 से स्वर्ण जयन्ती स्व रोजगार योजना में मिला दिया गया है। 

    राज्य प्रयोजित रोजगार -- रोजगार के लिए सरकार ने निमन कार्यक्रम प्रारम्भ किय गए हैं 

1  अन्त्योदय अन्य कार्यक्रम -1977 -78
2   राष्ट्रिय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम - 1980 
3   ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारण्टी कार्यक्रम -  1983 
4   जवाहर रोजगार योजना - 1989 
5   स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना - 1999 

  ऋण मुक्ति के लिए नियमन अध्यादेश -- उत्तर प्रदेश सरकार तथा अन्य राज्य सरकारों ने कृषि श्रमिकों की ऋण मुक्ति के लिए अनेक अध्यादेश पारित किए हैं। 

   कृषि श्रमिक सामाजिक सुरक्षा योजना -- इस योजना को वर्ष 2001 में शुरू किया गया , जिसके द्वारा कृषि मजदूरों को बीमा सुरक्षा का लाभ मिलता है। 

   कुटीर तथा लधु उद्योगों का विकास -- सरकार द्वारा गाँव में लघु तथा कुटीर उद्योगों का विकास किया जा रहा है। जिससे कृषि श्रमिकों की बेरोजगारी दूर की जा सके। 

   क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना -- कृषि मजदूरों को ऋण देने तथा अन्य सुबिधाओं को उपलब्ध करने के लिए सरकार द्वारा क्षेत्रीय  ग्रामीण बैंकों की स्थापना की गई है। 

    महात्मा गाँधी राष्ट्रिय ग्रामीण रोजगार योजना -- इस योजना का प्रारम्भ 2 जनवरी 2006 को आन्ध्र प्रदेश के  अनन्तपुर जिले से किया गया तथा एक अप्रैल 2008 से यह समस्त देश में लागू हो गया। इस योजना के अनुसार ग्रामीण परिवार के  एक बालिग सदस्य को 100 दिन के रोजगार की गारण्टी मिलती है। आवेदन के 15 दिन के अन्दर सरकार आवेदक को रोजगार उपलब्ध कराएगी अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देगी। इस योजना में महिलाओं के लिए रोजगार संबन्धी विशेष व्यवस्था हैं। 


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