सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं राशनिंग --
सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था है , जिसमे आवश्यक उपभोग की कुछ वस्तुओं अथवा खाद्य पदार्थ को न्यूनतम मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराया जाता है। सरकार द्वारा आम लोगों को अनिवार्य वस्तुएँ - खाद्यान्न चीनी , मिटटी का तेल आदि आवश्य वस्तुएँ उचित दर की दुकानों द्वारा वितरित की जाती है। इस सेवा को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नाम से जाना जाता है। सरकार द्वारा नियंत्रित मूल्य तथा मात्रा में वस्तुओं की आपूर्ति करना राशनिंग कहलाता है। भारत में राशनिंग के मुख्य अंग है - साँफ्ट कोक डिपो , सुपर बाजार तथा सहकारी उपभोक्ता भण्डार।
भारत में अधिकांश आबादी आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई है , जिसको बाजार के उतार - चढ़ाव तथा महँगाई से बचाना आवश्यक होता है। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली महत्वपूर्ण सिद्ध होती है। इसके अतिरिक्त इससे खाद्य सुरक्षा भी उपलब्ध हो पाती है , जिससे कुपोषण एवं भुखमरी पर नियंत्रण हो पाता है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ददेश्य --
उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से नियंत्रित मूल्य पर आवश्यक वस्तुएँ एवं खाद्यान जैसे -- चावल , गेहूँ , चीनी आदि उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
साधारण व्यक्ति को महँगाई के प्रमाण से बचाना।
पूरे देश में सामाजिक कल्याण के उद्देश्यों को प्राप्त करना।
बाढ़ , सूखा जैसी आकस्मिकताओं में खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित करना।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभ --
गरीब लोगों को नियंत्रित मूल्य पर आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध हो पाती है
आवश्यक वस्तुओं के मूल्य को नियंत्रित करना सम्भव होता है।
जमाखोरी कालाबाजारी जैसे समाज विरोधी तथा अनार्थिक कार्यों पर नियंत्रण हो पाता है।
खाद्यान्न तथा आवश्यक वस्तुओं का न्यायोचित वितरण किया जा सकता है।
इससे समाजवादी तथा लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना होती है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कमियाँ --
भ्र्ष्टाचार -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सबसे बड़ा देश इस प्रणाली में निरंकुश होता भ्र्ष्टाचार होता है।
इस प्रणाली के अन्तर्गत गरीबों के लिए आवंटित राशन की कालाबाजारी की जा रही है। गरीबों से खाद्यान्न के बदले सामान्य से अधिक मूल्य वसूला जा रहा है।
लालफीताशाही -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सरकारी नौकरशाही अत्यधिक हावी है , जो इस प्रणाली को जजर्र बना रही है। लालफीताशाही के कारण अनाज गोदामों में सड़ तो जाता है , किन्तु वितरित नहीं हो पाता।
अकुशल प्रबन्ध -- सार्वजनिक प्रणाली प्रबन्ध की अकुशलता से जूझ रही है। इसी अकुशल प्रबन्ध के कारण खाद्यान्न की खरीद से लेकर वितरण तक सरकार को भारी राजस्व की हानि होती है।
राजकोषीय घाटे की पोषक -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत बेचा जाने वाला कैरोसिन तेल सब्सिडी वाला होता है , जो सरकार के राजकोषीय घाटे में वृद्धि करता है।
उचित नियंत्रण का आभाव -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली अभी - भी पुराने काम - काज के तरीकों को ढो रही है , जिस कारण इन पर उचित नियंत्रण स्थापित नहीं हो पाता।
संचार प्रोद्योगिक के उपायोग का आभाव -- वर्तमान संचार प्रोधोगिकी के युग में भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली इससे वंचित है जिस कारण समय , धन व् संसाधन की बर्बादी होती है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावशाली बनाने के लिए इसको संचार प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाए तथा वस्तुओं या पदार्थो की खरीद भण्डारण एवं वितरण में पारदर्शिता होनी चाहिए। इसे लागत कुशल बनाना आवश्यक है। पदार्थों का पर्याप्त बफर स्टाँक रखना और कुशल बनाना आवश्यक है। पदार्थों का पर्याप्त बफर स्टाँक रखना और उसकी सुरक्षा आवश्यक है। समय - समय पर निरीक्षण करना एवं भ्र्ष्टाचार पर नियंत्रण भी आवश्यक है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था है , जिसमे आवश्यक उपभोग की कुछ वस्तुओं अथवा खाद्य पदार्थ को न्यूनतम मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराया जाता है। सरकार द्वारा आम लोगों को अनिवार्य वस्तुएँ - खाद्यान्न चीनी , मिटटी का तेल आदि आवश्य वस्तुएँ उचित दर की दुकानों द्वारा वितरित की जाती है। इस सेवा को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नाम से जाना जाता है। सरकार द्वारा नियंत्रित मूल्य तथा मात्रा में वस्तुओं की आपूर्ति करना राशनिंग कहलाता है। भारत में राशनिंग के मुख्य अंग है - साँफ्ट कोक डिपो , सुपर बाजार तथा सहकारी उपभोक्ता भण्डार।
भारत में अधिकांश आबादी आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई है , जिसको बाजार के उतार - चढ़ाव तथा महँगाई से बचाना आवश्यक होता है। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली महत्वपूर्ण सिद्ध होती है। इसके अतिरिक्त इससे खाद्य सुरक्षा भी उपलब्ध हो पाती है , जिससे कुपोषण एवं भुखमरी पर नियंत्रण हो पाता है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ददेश्य --
उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से नियंत्रित मूल्य पर आवश्यक वस्तुएँ एवं खाद्यान जैसे -- चावल , गेहूँ , चीनी आदि उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
साधारण व्यक्ति को महँगाई के प्रमाण से बचाना।
पूरे देश में सामाजिक कल्याण के उद्देश्यों को प्राप्त करना।
बाढ़ , सूखा जैसी आकस्मिकताओं में खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित करना।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभ --
गरीब लोगों को नियंत्रित मूल्य पर आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध हो पाती है
आवश्यक वस्तुओं के मूल्य को नियंत्रित करना सम्भव होता है।
जमाखोरी कालाबाजारी जैसे समाज विरोधी तथा अनार्थिक कार्यों पर नियंत्रण हो पाता है।
खाद्यान्न तथा आवश्यक वस्तुओं का न्यायोचित वितरण किया जा सकता है।
इससे समाजवादी तथा लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना होती है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कमियाँ --
भ्र्ष्टाचार -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सबसे बड़ा देश इस प्रणाली में निरंकुश होता भ्र्ष्टाचार होता है।
इस प्रणाली के अन्तर्गत गरीबों के लिए आवंटित राशन की कालाबाजारी की जा रही है। गरीबों से खाद्यान्न के बदले सामान्य से अधिक मूल्य वसूला जा रहा है।
लालफीताशाही -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सरकारी नौकरशाही अत्यधिक हावी है , जो इस प्रणाली को जजर्र बना रही है। लालफीताशाही के कारण अनाज गोदामों में सड़ तो जाता है , किन्तु वितरित नहीं हो पाता।
अकुशल प्रबन्ध -- सार्वजनिक प्रणाली प्रबन्ध की अकुशलता से जूझ रही है। इसी अकुशल प्रबन्ध के कारण खाद्यान्न की खरीद से लेकर वितरण तक सरकार को भारी राजस्व की हानि होती है।
राजकोषीय घाटे की पोषक -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत बेचा जाने वाला कैरोसिन तेल सब्सिडी वाला होता है , जो सरकार के राजकोषीय घाटे में वृद्धि करता है।
उचित नियंत्रण का आभाव -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली अभी - भी पुराने काम - काज के तरीकों को ढो रही है , जिस कारण इन पर उचित नियंत्रण स्थापित नहीं हो पाता।
संचार प्रोद्योगिक के उपायोग का आभाव -- वर्तमान संचार प्रोधोगिकी के युग में भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली इससे वंचित है जिस कारण समय , धन व् संसाधन की बर्बादी होती है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव -- सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावशाली बनाने के लिए इसको संचार प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाए तथा वस्तुओं या पदार्थो की खरीद भण्डारण एवं वितरण में पारदर्शिता होनी चाहिए। इसे लागत कुशल बनाना आवश्यक है। पदार्थों का पर्याप्त बफर स्टाँक रखना और कुशल बनाना आवश्यक है। पदार्थों का पर्याप्त बफर स्टाँक रखना और उसकी सुरक्षा आवश्यक है। समय - समय पर निरीक्षण करना एवं भ्र्ष्टाचार पर नियंत्रण भी आवश्यक है।
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