द्वितीय विश्वयुद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि --

प्रथम विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद पेरिस शान्ति सम्मेलन 1919 में आयोजित किया गया , राष्ट्र संघ की स्थापना की गई और शान्ति व् सुरक्षा की बात की जाने लगी , किन्तु इस युद्ध के महज दो दशकों के पश्चात ही विश्व कको दूसरे महायुद्ध का सामना करना पड़ा , जो अपने स्वरूप , विस्तार एवं प्रभाव में पहले युद्ध की अपेक्षा बहुत विस्तृत था। द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत जर्मनी द्वारा 1 सितंबर 1939  पोलैण्ड पर आक्रमण के साथ हुई। इस युद्ध के प्रारम्भ से ही यूरोप दो विरोधी गुटों में विभाजित हो गया था एक दल को धुरी राष्ट्र तथा दूसरे दल को मित्र राष्ट्र कहा जाता था धुरी राष्ट्र में इटली , जर्मनी , जापान इत्यादि देश थे तो मित्र राष्ट्र में इग्लैण्ड , फ्रांस आदि शक्तिशाली देश थे। इस युद्ध में मित्र राष्ट्र देशों ने पोलैण्ड का साथ दिया। 14 अगस्त 1945  जापान के आत्मसमर्पण के साथ इस युद्ध का अन्त हो गया। 

द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण --

प्रथम विश्ह्वयुद्ध की समाप्ति के बाद भी पराजित पक्ष तथा विजेता पक्ष के बीच मतभेद समाप्त नहीं हुए थे। पराजित पक्ष हर हल में विजेता पक्ष से अपनी हार और अपमान का बदला लेने के लिए आतुर था इन सभी परिस्थितियों में द्वितीय विश्वयुद्ध अवश्यम्भावी हो गया।

वर्साय की सन्धि -- द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रमुख कारण वर्साय की सन्धि 1919 में की गयी क्योकि ऐसी सन्धि में द्वितीय विश्व - युद्ध के बीच छिपे थे। इस सन्धि में जर्मनी का अपमान किया गया था। इस सन्धि पर जर्मण प्रतिनिद्धियों से बलपूर्वक हस्ताक्षर करवाए गए थे और जर्मनी के सारे साम्राज्य को छिन्न - भिन्न क्र दिया गया था।

नवीन विचारधाराओं का उदय --  प्रथम  विश्वयुद्ध के पश्चात विश्व में एक नई प्रकार की विचारधारा का उदय हुआ। यह विचारधारा थी - तानाशाही की विचारधारा। तानाशाही विचारधारा के समर्थक कतंत्र  विश्वास करते थे। यह विचारधारा पुरानी लोकतान्त्रिक विचारधारा  टककर दे रही थी। विश्व इन दो विचारधाराओं - तानाशाही विचारधारा और लोकतांत्रिक विचारधारा में बंट गया था। इग्लैण्ड , फ्रांस ,  अमेरिका आदि देश लोकतंत्र के समर्थक थे , वही इटली , जर्मनी एवं जापान जैसे देश एकतंत्र के समर्थक थे। इन दोनों विचारधाराओं के टकराव ने द्वितीय विश्वयुद्ध को जन्म दिया।

वीमर सरकार की असफलता व् हिटलर का उत्थान -- प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी की वीमर सरकार जर्मन जनता की भावनाओं को सन्तुष्ट करने में असफल रही। युद्ध समाप्त होने के बाद बेकरी , भुखमरी , महँगाई इत्यादि ने जर्मन की जनता को शारीरिक , मानसिक तथा आर्थिक रूप से दयनीय स्थिति में पहुँचा दिया था युद्ध के समय में हुई क्षति की क्षतिपूर्ति करने के लिए वीमर सरकार को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा  था। इन गम्भीर परिस्थितियों में जर्मनी में हिटलर ने नाजी पार्टी की स्थापना की। हिटलर का जन्म 1889 में ऑस्ट्रिया में हुआ था। उसने मेरा संघर्ष नामक पुस्तक की रचना की। हिटलर वर्ष 1933 में जर्मनी का चांसलर बना और वर्ष 1934 में तानाशाह बनकर वर्षाय की सन्धि का उललंघन करना प्रारम्भ कर दिया।

तुष्टिकरण की नीति की असफलता -- इग्लैण्ड ने अपने हितों की रक्षा के लिए तुष्टिकरण की नीति अपनाई। इस नीति के कारण वह जर्मनी के प्रति सहानुभूति रखता था , जिस कारण हिटलर को चेकोस्लोवाकिया व् आस्ट्रिया पर अधिकार का अवसर मिला। तुष्टिकरण की नीति के कारण ही हिटलर को साम्राज्य विस्तार व् सैन्य शक्ति मजबूत करने का मौका मिला।

हिटलर की आक्रामक नीति -- हिटलर ने सत्ता - प्राप्ति के पश्चात उग्र विदेश नीति का अनुसरण किया। उसने इस नीति का पालन करते हुए  चेकोस्लोवाकिया , ऑस्ट्रिया को जर्मन - साम्राज्य में मिला लिया ,साथ ही लिथुआनिया से ,मेमल का प्रदेश बलपूर्वक छीन लिया तथा पोलैण्ड के गलियारे एवं डेन्जिंग के बन्दरगाह पर अधिकार करने का प्रयास किया। हिटलर की आक्रामक नीतियों के कारण ही मित्र राष्ट्रों को अपनी तुष्टिकरण नीति को त्यागकर युद्ध के लिये तैयार होना पड़ा।

तानाशाही का विकास -- प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के  पश्चात यूरोप में तानाशाही शासन का विकास हुआ। तानाशाही शासन के अंतर्गत जर्मनी में हिटलर तथा इटली में मुसोलिनी का उदय हुआ इन दोनों ही तानाशाहों ने प्रथम विश्वयुद्ध में हुए अपमान का बदला लेने की भावना से जनता को भड़का कर तानाशाही स्थापित की। इन तानाशाहों ने यूरोप में साम्राज्य विस्तार की नीति अपनाई , जो द्वितीय विश्वयुद्ध का एक महत्वपूर्ण कारण बनी।

निशस्त्रीकरण की असफलता --  वर्साय की सन्धि के तहत निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया को अपनाने पर बल दिया गया था। इस सन्धि में जर्मनी का तो निशस्त्रीकरण कर दिया गया था , किन्तु मित्र राष्ट्रों ने खुद इसका पालन नहीं किया। वे बड़े पैमाने पर अस्त्र - शस्त्र को बढ़ावा दे रहे थे तथा अपनी सैनिक शक्ति में वृद्धि कर रहे थे। हिटलर ने जल थल एवं वायु सेना के द्वारा जर्मनी का पूर्णतया सैन्यीकरण कर दिया। इस प्रकार निशस्त्रीकरण की असफलता ने द्वितीय विश्वयुद्ध को तीव्र कर दिया।

राष्ट्र संघ की विफलता -- राष्ट्र संघ की स्थापना अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति की प्राप्ति के लक्षय को लेकर हुई थी , किन्तु महाशक्तियों के असहयोगी व्यवहार के कारण और जर्मनी , इटली एवं जापान की घोर उपेक्षा के कारण यह अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में विफल रहा।

पोलैण्ड की समस्या -- पेरिस  शान्ति सम्मेलन के निर्णय के अनुसार पोलैण्ड को एक स्वतंत्र राज्य बना दिया गया तथा पोलैण्ड में लोकतान्त्रिक व्यवस्था स्थापित की गई। पोलैण्ड को समुद्र तट से जोड़ने के लिए जर्मन के बीच से होकर एक मार्ग बना दिय्या गया। यह पोलिश गलियारा डेंजिग के बीच से होकर एक मार्ग बना दिया गया। यह पोलिश गलियारा डेंजिग के बंदरगाह तक जाता था। इस मार्ग के बारे में हिटलर का यह कहना था कि डेंजिंग में जर्मन जाति  लोग निवास करते हैं , अतः डेंजिंग पर हमारा अधिकार होना चाहिए।

इस बात को मानने लिए पोलैण्ड तैयार नहीं था। 1 सितंबर 1939  जर्मनी ने प्रातः 5 बजे पोलैण्ड पर आक्रमण कर दिया। पोलैण्ड की सुरक्षा  आश्वासन देने के कारण ब्रिटन , सभी ब्रिटिश उपनिवेश तथा फ्रांस ने भी जर्मनी के वीरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। अन्ततः द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारम्भ हो गया। यह द्वितीय विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण भी सिद्ध हुआ। 




























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