सत्याग्रह का अर्थ --

सत्याग्रह दो शब्दों से मिलकर बना है - सत्य + आग्रह जिसका शाब्दिक अर्थ है - सत्य के लिए आग्रह करना। सत्याग्रह के तहत सत्य की शक्ति के बल पर आग्रह द्वारा सत्य की खोज पर जोर दिया जाता है। गाँधी के अनुसार , सत्याग्रह का मार्ग अपनाकर न तो शत्रु को कष्ट पहुँचता है और न ही विनाश होता है। सत्याग्रह अपनाने के लिए शारीरिक बल की भी आवश्यकता नहीं है।

महात्मा गाँधी का सत्याग्रह आन्दोलन --

महात्मा गाँधी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद नीति के खिलाफ सत्याग्रह आन्दोलन का सफल संचालन किया था। भारत में इन्होने सत्याग्रह आंदोलन को अपनाया।

चम्पारण सत्याग्रह -- गाँधी जी ने भारत में सर्वप्रथम चम्पारण में ही सत्याग्रह का प्रयोग किया था। बिहार के चम्पारण जिले में किसानों को अपनी जमीन के 3/20 भाग पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ी थी और अपना उत्पादन बागान मालिकों द्वारा निर्धारित दरों पर ही बेचना पड़ता था। यह किसानों के लिए घाटे का सौदा था। जर्मनी द्वारा कृत्रिम नील को खोज कर लेने के बाद अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में प्राकृतिक नील की माँग कम होने लगी ,क्योकि वह महँगी पड़ती थी।

इसका विरोध करते हुए राजकुमार शुक्ल ने गाँधी जी को चम्पारण आने का न्यौता दिया। गाँधी भी राजेंद्र प्रसाद , मजहरुल - हक जे बी कृपलानी ,नरहरि पारिख और महादेव देशाई के साथ 1917 में चम्पारण पहुँचे।

खेड़ा सत्याग्रह -- 1917 में गुजरात के खेड़ा में बारिश के कारण किसानों की अधिकांश फसल नष्ट हो गई। ऐसे में भी ब्रिटिश सरकार की ओर से कर को माफ़ नहीं किया गया। इस पर गाँधी जी ने कर नहीं आन्दोलन चलाया। 22 मार्च 1918 को किसानों ने सत्याग्रह आन्दोलन शुरू कर दिया। भारत में गाँधी जी द्वारा चलाया गया यह पहला वास्तविक किसान सत्याग्रह था।

अहमदाबाद के मिल मजदूरों का समर्थन -- 1918 में अहमदाबाद के मिल मालिकों और मजदूरों को लेकर विवाद हो गया था। विवाद का मुख्य कारण यह था कि जब अहमदाबाद में प्लेग रोग फैला था , तो मजदूरों को आकर्षित करने के लिए मिल मालिकों ने मजदूरी का 75 % प्लेग बोनस रूप में मजदूरी देने का निर्णय लिया था , लेकिन जब प्लेग रोग खत्म हो गया तब मिल मालिकों ने बोनस देने से मना कर दिया। मजदूरों ने इसका विरोध किया। 22 फरवरी 1918 को मिल मालीकों ने तालाबन्दी की घोषणा कर दी।

इससे मजदूरों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी। महात्मा गाँधी जी के हस्तक्षेप करने पर मिल मालिकों ने हड़ताल वापस ली ली और मजदूरों को 35 % अधिक मजदूरी देने पर राजी हो गए।

















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