असहयोग आन्दोलन के परिणाम --

आर्थिक लाभ -- असहयोग आन्दोलन के दौरान विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने से बाजार में भारतीय वस्तुओं की माँग बढ़ गई। इससे मजदूरों , कामगरों और किसान को प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ हुआ।

निर्भीकता की भावना का विकास -- असहयोग आन्दोलन ने भारतीय के मन में निर्भीकता की भावना उतपन्न कर दी। भारतीय जनमानस में यह विचार उतपन्न हो गया कि सरकार के आतंक से डरने के बजाय उसका डटकर मुकाबला करके ही स्वतंत्रता को प्राप्त किया जा सकता है।

हिन्दू - मुस्लिम एकता तथा स्वराज का सन्देश -- असहयोग आन्दोलन का देश में व्यापक प्रसार हुआ था , इससे देश के प्रत्येक वर्ग के लोगों ने प्रतिभाग किया। किसान मजदूर , निरक्षर और बुद्धिजीवी लोग एक - दूसरे के सम्पर्क में आए और राष्ट्रीयता के मुद्दे पर विचार साझा किए। इस प्रकार असहयोग आन्दोलन के कारण उनमें राष्ट्रीयता का विकास हुआ।

कांग्रेस के दृष्टिकोण व् कार्यक्रम में बदलाव -- असहयोग आन्दोलन के पश्चात कांग्रेस ने अपने कर्यक्रम और किया। पहले जहाँ दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तन काँग्रेस सरकार की नीतियों का वैधानिक तौर पर विरोध करती थी , अब उनका विरोध प्रत्यक्ष रूप से सामने आने लगा। अब कांग्रेस को विश्वास हो गया की सत्याग्रह तथा असहयोग आन्दोलनों से ब्रिटिश हुकूमत को हिलाया जा सकता है तथा अपनी माँगों को मनवाया जा सकता है। काँग्रेस की यह रणनीति आगे चलकर काफी कारगर साबित हुई।

असहयोग आन्दोलन का महत्व --

भले ही असहयोग आन्दोलन अपने उद्देश्य की प्राप्ति में असफल रहा ,लेकिन इसने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में नए आयाम स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस आन्दोलन के बाद राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं की नीति में परिवर्तन आया और उन्होंने ज्ञापन और प्रार्थना - पत्र देने की नीति का त्याग करके अंग्रेज सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। इस आन्दोलन के माध्यम से ही राष्ट्रीयता की भावना गाँवों तक पहुँची। इससे पहले राष्ट्रीय आन्दोलन केवल बुद्धिजीवी तक ही सीमित था। असहयोग आन्दोलन के कारण ही भारतीय राष्ट्र्रीय कांग्रेस राष्ट्रीय आन्दोलन का केन्द्र बन गई।

















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