Art of Life जीवन की कला
Art of Life जीवन की कला
संसार में पहला सुख निरोगी काया माना गया है जिस व्यक्ति का स्वस्थ अच्छा होगा उसको जीवन के हर पहलु पर सफलता मिलेगी जहां व्यक्ति को सफलता मिलती है वहीं उसकी शक्ति में विस्तार होता है। स्वस्थ सफलता एवं शक्ति ये सभी दूसरे से जुड़े हुआ है। शुद्ध हृदय ( शुद्ध भावना ) ही अच्छे स्वस्थ्य का लक्षण है।
शुद्ध भावना ही मन में अटूट विश्वास पैदा करती है। जो सफलता की कुंजी है अतः सफल होने के लिए व्यक्ति को अपनी ऊर्जा का सही दिशा मई उपयोग करना चाहिए। सफलता सामर्थ्य लती है। परन्तु सफलता का सही रहश्य अपनी इच्छाओं का समयक दर्शन (right observation in the brain) मन में पैदा हुई हर इच्छाी को देखना अर्थात अपने द्वारा अपने को देखना इच्छाओं को काबू में रखना होता है।
उदहारण के लिए आप समझो की आप के एक हाथ में जलती हुई मिशाल या जलती हुई टोर्च है आप उसे तीव्रता से घुमाइए तो सामने वाले व्यक्ति को एक गोला सा दिखाई देता है। अथवा आप छत पर लटके हुए तीब्र गति से घूमते हुए पंखे को देखें तो एक गोला सा दिखयी देगा परन्तु सही मायने में ऐसा होता नहीं है। यह एक आभाषी विम्ब के रूप में गोलादिखाई देता है।
इसी प्रकार हमारे मन में हर क्षण भिन्न भिन्न प्रकार के विचार आते और जाते रहते है। अगर हम प्रत्येक विचार को रोक कर प्रकश डालें या आने वाले प्रत्येक विचार को लिखें तो आप पाओगे की 95 % विचार ऐसे है जिनका कोई अर्थ नहीं होता। जिन्हें हम मूर्खता पूर्ण विचार भी कह सकते हैं ।
शुद्ध विचार अटूट विश्वास पैदा करते है और वहीं पर स्वस्थ्य है सफलता है तथा सामर्थ्य है जिस व्यक्ति का मन और सरीर ( पांच ज्ञानेन्द्रियाँ ) सुध विचारों का ग्राही होता है उस व्यक्ति का सरीर शक्क्तिसाली विसुध सकरारत्मक वचार के प्रभाव मंडल से स्वस्थ होता है। तथा जीवन दायनी विचार धाराएं उत्पन्न होती है।
संपूर्ण सारीरिक स्वास्थ्य के लिए हमारा मस्तिष्क क्रोध,चिन्ता ,ईर्ष्या ,लालच तथा अन्य बुरे विचारो से मुक्त होना चाहिए। जब कोई व्यक्ति इस नकारात्मक तथा बुरी विचरधारा का शिकार होता है ,तो वहअच्छा स्वास्थ्य नहीं पा सकता। ऐसी नकारात्मकता मस्तिष्क की शांति को भंग करहैती और यही बीमारी का मुख्य कारण है। यही मस्तिस्क में बेममारी का बीज बोटा है। इस प्रकार एक बुद्धिमान व्यक्ति इन सभी नकारात्मक विचारो से दूर रहता है। वह जनता है कि बुरी सोच एक गंदे नाले या दुसित घर से अधिक खतरनाक है।
हमे प्रत्येक परिस्थती में अपने अंर्तमन की आवाज का अनुसरण करना चाहिए। हमारी चेतना हमे हमेशा सही मार्ग का अनुसरण करने की लिए निर्देषित करती है। हमे हमेशा अपनी अंतर् आत्मा के साथ सच्चा साथी बनकर झना चाहिए तथा अंतर् मन की आवाज का पूर्ण रूप से विश्वास करना चाहिए हमे अभय , निडर होकर मजबूत ह्रदय से अपने सुकर्म पर आश्रित रहना चाहिए। हमे प्रकृती , ब्रम्माण्ड के कानून पर अटल विस्वाव होना चाहिए प्रकृती के नियम और कानून के अनुसार जैसा हम करते है वैसा ही हम पते है। सुकर्म का परिणाम अच्छा होता है कुकर्म बुरे परिणाम लाते है सुकर्म , कुकर्म की पहचान हमे अपनी अंतर् आत्मा की आवाज से पहचान करनी चाहिए। हमे यह सकमझ न होगा की हम अच्छा या बुरा जैसा करेंगे वैसा ही फल मिलेगा
यह सत्य है की मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं होता है। सुकर्म की तरफ जाना या कुकर्म की तरफ ये हमारे विचारो पर निर्भर करता है यदि हमारे मस्तिष्क में अच्छे विचार रहेंगे तो हमारा प्रभाव हमारी सफलता उत्तम होगी अतः एक अनंत तथा स्थायी प्रभाव के लिए अथवा जीवन में सफलता पाने के लिए हमे एक प्रेम से परिपूर्ण ह्रदय तथा वस्तुओ के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। व्यवहारिक रूप में हमे निस्वार्थी तथा दुसरो की प्रति करुणा एवं दयलुता होनी चाहिए धन सम्पप्ती का प्रयोग हमे निजी स्वार्थ में नहीं करना चाहिए हमारा उद्द्देश्य प्रभाव तथा सफलता अधिक बड़ी तथा स्थाई होनी चाहिए।
जुनून , उमंग तथा समर्थ में बहुत बड़ा अनन्तर है। उमंग से परपूण वव्यक्ति सामर्थ्य ( शक्ति ) का द्रुप्योग करता है उमंग शक्ति को कमजोर बनाती है उमंग के द्वारा प्रेरित हुआ व्यक्ति अपने कार्य को सफलता पूर्वक पूर्ण नहीं कर सकता क्यों की उमंग ( उचंग ) अल्ल्प कलिक होती है व्यक्ति में उमंग एक तीव्र गति से अये हुए तूफान की तरह होती है। कुछ समय के लिए तूफान आया और उसने अपना विध्वंशक रूप अपनाया और थोड़े ही समय में अपना छणिक प्रभाव दिखाकर लुप्त हो जाता है। ऐसा ही उमग से ग्रसित व्यक्ति के साथ होता है। जैसे ही उसकी उमंग का प्रभाव कम होता है, वह सफलता पूर्वक अपना कार्य पूरा नहीं कर सकता। जबकि दूसरी और सामर्थ्य एक चट्टान की तरह है। यह प्रत्येक परिस्थती में शांत तथा अडिग रहता हे। अतः एक सामर्थ्यवान व्यक्ति चट्टान की तरह तूफान (असफलता तथा कठिनाईयो ) से प्रभावित नहीं होता तथा स्वयं एवं अपनी शक्तियों में विश्वास रखते हुए सफल होता है।
मनुष्य जीवन में उद्द्देश्य की प्राप्ति के लिए स्वयं को न्योछावर कर देना चाहिए तथा अपने उद्द्देश्य से कभी बिमुख नहीं होना चाहिए। मनुष्य को उद्द्देश्य का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए दोहरी मानसिकता वाला मनुष्य सदा संदेह के घेरे में रहता है। मनुष्य अपनी चेतना का अनुसरण करते हुए अपनी अंतर् मन की आवाज द्वारा उचित मार्ग दर्शन पर सीडी दर सीडी बढ़ते रहना चाहिए द्र्ष्टी से ही श्रष्टी को देखने का तरीका अपनाना चाहिए।
पवित्र ह्रदय तथा संतुलित मस्तिष्क ही अच्छे स्वास्थ्य का रहस्य है। सफलता का रहस्य स्वयं में अटूट विश्वास तथा समझदारी पूर्वक चुना गया जीवन का उद्देश्य है सामर्थ्य (शक्ति ) का रहस्य अपने मन की इच्छाओ को नियन्त्रित करने की द्रढ़ इच्छा शक्ति है। यदि कोई व्यक्ति उपरोक्त बताई गई विशेषताओं ( गुणों ) को विकसित कर लेता है तो वह अपने जीवन में एक अच्छे स्वास्थ्य , सामर्थ्य तथा सफलता का आनंद ले सकता है।
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