EARTHQUAKE - भूकंम्प
भूकम्प EARTHQUAKE --
भूकंम्प का शाब्दिक अर्थ पृथ्वी का कांपना या हिलना है। पृथ्वी के आंतरिक भावों में हलचल के कारण पृथ्वी अचानक कंम्पन करती है , इस घटना को भूकम्प कहते है।
तीव्रता के आधार पर भूकम्प अनेक प्रकार के होते है। भूकम्प की तीव्रता को रिएक्टर पैमाने पर मापा जाता है। विश्व में प्रतिवर्ष प्राकृतिक आपदाओं में मरे गए लोगों में से 15 % - 20 % भूकम्प जनित आपदा में मरे जाते है।
भूकम्प की उत्तपति --
भूकंम्प की उत्तपति पृथ्वी के आंतरिक भागों में जिस बिंदु पर होती है उसे भूकम्प केंद्र या भूकम्प मूल कहा जाता है। भूकम्प केंद्र के चारो ओर भूकंप की लहरे फेलतीं है।
भूकम्प केंद्र के ठीक ऊपरी धरातल , जहां पर भूकम्प की लहर पहले पहुँचती है उसे भूकम्प अभिकेंद्र कहते है। अभिकेंद्र पर ही सर्वप्रथमं भूकम्प के झटके महसूस किये जाते है। इसके पश्चात इसके चारो ओर के क्षेत्र में भूकम्प के झटके महसूस किये जाते है।
भूकम्प के कारण --
ज्वालामुखी उदगार --
जब बिव्रतनिक हलचलों के कारण भू - गर्भ में उपस्थित गैस युक्त लावा भू - पटल की ओर प्रवाहित होने लगता है। तो उसके दवाब के कारण भू - पटल की शेलें हिलने लगती है। जब लावा पुरे वेग के साथ किसी स्थान से बाहर निकलता है , तो वहाँ ज्वालामुखी विस्फोट होता है , जिससे आस - पास के भूमि क्षेत्र में कम्पन उतपन्न होता है। 1883 में जावा व सुमात्रा के मध्य ज्वालामुखी उडगार के कारण भयंकर भूकम्प आया।, जिसका प्रभाव 8,000 मील तक था।
भू - संतुलन में अव्यवस्था --
भू- पटल पर बिभिन्न बल समतल समायोजन में लगे रहते है , जिससे भू - गर्भ के शियाल एवं सिमा पर्तों में परिवर्तन होते रहते है। यदि परतों में ये परिवर्तन एका एक तीव्र गति से होने लगते है , तो भू - पटल पर कम्पन होने लगता है। 4 मार्च 1949 को हिन्दू कुश पर्वत पर आया भूकम्प भू - संतुलन अव्यवस्था हुआ था।
भू - पटल में सिकुड़न --
विवरण के कारण भू गर्भ की ऊष्मा धीरे धीरे कम होती जा रही है , जिससे पृथ्वी अपनी उतपत्ति के समय से निरंतर ठंडी हो रही है। भू - गर्भीय ऊष्मा के कम होने से पृथ्वी की ऊपरी पपड़ी में सिकुड़न आने लगती है। यह सिकुड़न पर्वत निर्माण प्रक्रिया को जन्म देती है। इस प्रक्रिया के तीव्र होने पर भू - पटल पर आरम्भ हो जाता है।
जलीय भार --
मानव द्वारा निर्मित जलाशय , झील अथवा बांध के धरातल के निचे की चट्टानों पर भार एवं दवाव के कारण भी भूकम्प आते है। वर्ष 1967 में कोयना भूकंप कोयना बांधो के जलसय के कारण आया था।
प्लेटविवर्त निति -
महाद्वीप तथा महासागरीय देश विशाल आंतरिक भू - खण्डों से बने है , जिन्हें प्लेट कहते है। ये सभी प्लेट विभिन्न गति से गतिशील रहती है। जब कभी ये प्लेटें आपस में टकराती है , तब भूकम्प आते है। 26 जनबरी , 2011 को गुजरात भुज में प्लेटों के टकराने के कारण ही भूकम्प उत्तपन्न हुआ था।
वलन तथा भृंश --
भू - पटल पर दबाव तथा तनाव के कारण चट्टानों वलन तथा भृंश पड़ जाते है , उक्त स्थान कंम्पन उत्तपन्न होता है। बर्ष 1991 में उत्तरकाशी में आये भूकंम्प मूल कारण वलन तथा भृंश ही मन जाता है।
मानवनिर्मित कारण --
कई बार मानवनिर्मित कार्यों अथवा कृत्रिम कारणों से भी भूकम्प उतपन्न होते है। जिसका प्रभाव क्षेत्र काफी सिमित होता है। परमाणु परीक्षण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में पथ निर्माण के लिए किये जाने वाले विस्फोट के कारण भी आस - पास का क्षेत्र कम्पिल हो जाता है।
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