Women Education - नारी तू नारायणी

नारी शिक्षा 

           नारी तू नारायणी                         


                          आधुनिक युग मै महिलाओ के काम करने के लिए अनेको अवसर है। अब महिलाए घर से बाहर जाकर कार्य करने के लिए स्वन्तंत्र है। और हमारे सामने अब इसके बहुत सारे अच्छे उदाहरण है। आज महिलायं अपनी योग्यता के आधार पर अनेकों  उचाइयो को छू रही है।    

                            महिलाये सामाजिक कार्य , जन -जीवन का कार्य अथवा राजनीति में हिस्सा ले सकती है।  वे प्रशसन के क्षेत्र में भी कार्य कर सकती है। हमारे समाज को अनुशासित मस्तिष्क तथा नियंत्रित आचरण वाल स्त्रियों कीआवश्यता है। उन्हें अपने कर्तव्य में ईमानदार तथा अनुशासित होना चाहिए ,जिसे वे करती भी है।  कोई भी व्यक्ति केवल तभी अपने कार्य में सफल होगा जब वह अनुशासित होगा । हमारे देश में लड़कियों की शिक्षा का पर्याप्त पसार नहीं है। अतः ऐसे संस्थान ,जहाँ लड़कियों को शिछा प्रदान की जाती है ,उन्हें मान्यता दी जानी चाहिए तथा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जिस प्रकार की शिक्षा उन्हें दी जाती है ,विस्तृत होने के साथ -साथ गहन भी हो। हमारे देश में जो शिक्षा दी जाती है ,वह विस्तृत है पर उसमें गहनता की कमी है। यद्धपि शिक्षा हमे  विद्धान  तथा कुसल बनाएगी ,परन्तु यदि यह हमें उद्देश्यपूर्ण जीवन प्रदान करने में सहायता नहीं करती है ,तो यह निर्रथक है। इसे ऐसा होना चाहिए ,जिससे क्षात्र अपने जीवन का उद्देश्य निर्धारित कर सकें ,क्योंकि बिना इसके जीवन लक्ष्यविहीन तथा निर्थरत होता है।

दया एक ऐसा गुण है ,जो मुख्यतः जन्म से ही महिलाओ में पाया जाता है। एक व्यक्ति ,जो अपने साथियों के साथ दया का भाव नहीं रखता ,मानव नहीं हो सकता। अतः मानवों को गुणों , जैसे -उदाहरण ,दयालुता तथा सहानभूति को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। बिना इस गुणों के इंसान पशु के समान है। उसे सभ्य नहीं कहा जाएगा। इसलिए हमें दूसरों के प्रति सहानभूति तथा चिंता जैसे गुणों को विकसित करना चाहिए। 

शिक्षा का एक निश्चित उद्द्देश्य या लछ्य होते है।  जब हम छत्रों को शिक्षा प्रदान करते है तब हमारे सामने अनेक लछ्य होते है। प्रथम उद्देश्य छात्रों को विज्ञानं,  इतिहास तथा भूगोल के विषयो के अध्यापन से संसारिक ज्ञान देना होता है।  इसके अतिरिक्त हमे छात्रों को तकनीकी कौशल भी सीखना चाहिए।  शिक्षा का अन्य उद्द्देश्य लोगो को नौकरी के लिए आवश्यक व्यवसायक योग्यता को पपरदन करना भी होता है। 


शिक्षा का प्रमुख उद्द्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान या जीवनयापन के लिए तकनीकी कौशल नहीं है , वरन छत्रों में महत्वपूर्ण गुणों के विकास भी एक बेहतर जीवन के लिए जरूरी है। अतः शिक्षा का मुख्य उद्देश्य उच्च जीवन में प्रवेश करना भी है।  अतः शिक्षा हमे उस संसार में ले जाती है ,  जो स्थान एवं समय से परे है। यही शिक्षा का मुख्य उद्द्देश्य है।  


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