विदेशी व्यापार का महत्व
विदेशी व्यापार का महत्व --
विदेशी व्यापार अर्थात आयात और निर्यात से सभी देश लाभदायक होते हैं। भारतीय संदर्भ में विदेशी व्यापार का महत्व व्यक्त किया जा सकता है।बाजार की उपलब्धता -- प्रत्येक देश किसे न किसी वस्तु का उत्पादन देश की आवस्यकता से अधिक होता है , ऐसी स्थिति में शेष उत्पादन को विदेशी व्यापर से बड़ा बाजार उपलब्ध हो पता है।
विविध वस्तुओं की उपलब्धता -- विदेशी व्यापार के माध्यम से अलग - अलग देशों में उत्पादित वस्तुओं का व्यापार होता है। इससे किसी देश में विशेष वस्तु का अभाव दूर हो पाता है। भारत में दाल की कमी होने पर आँस्ट्रेलिया से दाल मंगाई जाती है।
उत्पादन विशिष्टीकरण -- विदेशी व्यापार तथा विदेशों में किसी विशेष वस्तु या सेवा की माँग होने पर कोई देश उस वस्तु के उत्पादन में विशिष्टीकरण प्राप्त करर लेता है। उदाहरण के लिए - भारत का साँफ्टवेयर उद्योग।
उचित मूल्य पर वस्तु की प्राप्ति -- तकनीकी एवं संसाधनों की कमी के कारण कभी - कभी किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि हो जाती है , जो अर्थव्यवस्था के अनुकूलन नहीं होती है। ऐसी स्थिति में आयात के माध्यम से सस्ती वस्तुएँ प्राप्त की जा सकती है।
संकट का सामना -- जब कभी किसी देश में प्राकृतिक अथवा मानवीय कारणों से संकट उतपन्न होता है , जो आयात के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त किया जा सकता है
संसाधनों का समुचित उपयोग -- विदेशी व्यापार के माध्यम से वृहत बाजार उपलब्ध होने के साथ - साथ नई तकनीकों का भी आगमन होता है। इस प्रकार के लाभदायक अवसर प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों के समुचित्त उपयोग को बढ़ावा देते हैं।
प्रतिस्पर्द्धा का लाभ -- विदेशी व्यापार में अपने - अपने उत्पादों को बेचने के लिए विभिन्न राष्ट्र आपस में प्रतिस्पर्द्धा करते है। इससे उपभोक्ता को उचित मूल्य पर अच्छी गुडवत्ता वाली वस्तुएँ प्राप्त होती हैं।
आर्थिक विकास -- आधुनिक मशीनरी तथा तकनीकों के आयत तथा निर्मित वस्तुओं के निर्यात से राष्ट्रिय आय में वृद्धि होती है। इससे आर्थिक विकास को गति मिलती है।
रोजगार सृजन -- विदेशी व्यापार से प्राप्त होने वाले वृहत बाजार से अधिकाधिक उत्पादन को बढ़ावा मिलता है , जिससे अधिक से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन होता है।
राष्ट्रिय आय में वृद्धि -- भारत में निर्मित वस्तुओं के निर्यात तथा विदेशों से वस्तुओं के आयात तथा उनके विक्रय पर सरकार सीमा शुल्क के अतिरिक्त कई अन्य प्रकार के कर वसूलती है। इससे राष्ट्रिय आय में वृद्धि होती है।
उत्पादन तकनीक में सुधार -- अल्पविकसित अथवा विकासशील देशों में बेहतर एवं आधुनिक तकनीक का आभाव होता है। इस आभाव को विकासशील देश आयात के माध्यम से दूर करते हैं।
सहयोग एवं शान्ति को बढ़ावा -- विदेशी व्यापार के माध्यम से न केवल वस्तुओं एवं सेवाओं का आदान - प्रदान होता बल्कि विभिन्न प्रकार की संस्कृति एवं रीति - रिवाजों का भी आदान - प्रदान होता है। इससे वैश्विक सहयोग एवं शान्ति को बढ़ावा मिलता है।
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