Ecosystem
पारस्थितिक तंत्र का निर्माण
प्रत्येक पारस्थितिक तंत्र का निर्माण अजैविक घटकों कार्बनिक अकार्बनिक पदार्थ एवं जलवायवीय कारक तथा जैविक घटकों उत्पादक उपभोक्ता एवं अपघटक इनसे ममिलकर बना होता है अतः किसी भी पारस्थितिक तंत्र में अजेविक घटको तथा जैविक घटको की बीच पारस्परिक अंतरकिृयाये द्वारा सम्पूण तंत्र में ऊर्जा के संचरण की क्रमिक अवस्थाओं को पारस्थितिक तंत्र की कार्य प्रणाली कहा जा सकता है | पारस्थितिक तंत्र की कार्य प्रणाली को निमनलिखित चरणों में विभक्त करकर स्पष्ट किया जा सकता है -पारिस्थितिक तंत्र का उत्पादन Production of Ecosystem -
1 पारिस्थितिक तंत्र का उत्पादन Production of Ecosystem -- किसी भी पारस्थितिक तंत्र की कार्य प्रणाली का प्रथम चरण तंत्र के बिभिन्न घटको के माध्यम से उत्पादन का कार्य है | इस चरण में मुख्य रूप से समस्त अजैविक घटक तथा हरे पादप महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | हरे पादप वायु से कार्बन डाईआक्साइड, मृदा, जल तथा खनिज तत्व लेते है तथा सौर ऊर्जा की सहायता से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा भोजन कार्बनिक पदार्थो - कार्बोहाइडेट वसा, प्रोटीन का निर्माण करते है | उपर्युक्त भोजन वह फल, फूल, तना, सब्जी, जड़ों आदि भागों से संग्रहित के लेता है इस प्रकार सौर ऊर्जा कार्बनिक पदार्थो के रूप में संचित हो जाता है ऊर्जा का यह संचालन ही पारस्थितिक तंत्र का प्राथमिक उत्पादन कहलाता है | इस उत्पादन से ही ऊर्जा संचालन प्रारम्भ होता है |पारस्थितिक तंत्र में उपभोग Consumption in Ecosystem
2 पारस्थितिक तंत्र में उपभोग Consumption in Ecosystem -- हरे पादपों द्वारा निर्मित कार्बनिक पदार्थो का कुछ भाग स्वयं पदार्थो का कुछ भाग स्वयं पदार्थो की शारीरिक क्रियाओ के सम्पादन में खर्च हो जाती है | शेष संचित भोजन को शाकाहारी प्रथम श्रेणी के उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग में लाया जाता है इस प्रकार ऊर्जा का संचरण वनस्पतियो से शाकाहारी जन्त्तुओ में हो जाता है | शाकाहारी जंतु द्वितीयक व् तृतीयक श्रेणी के मासहारी जन्तुओ के लिए भोजन होते है अतः शाकाहारी जन्तुओ से ऊर्जा का संचालन मासाहरी जन्तुओ में हो जाता है ऊर्जा संचरण की इस क्रमिक प्रक्रिया पादपों से लेकर माँसाहारी जन्तुओ तक ऊर्जा की मात्रा का निरंतर हास् होता जाता है अर्थात हरे पदपो को सबसे अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है तथा अन्तिम मासाहरी जंन्तु सबसे कम ऊर्जा को प्राप्त करते है |पारस्थितिक तंत्र में अपघटक Decomposition in Ecosystem
3 पारस्थितिक तंत्र में अपघटक Decomposition in Ecosystem -- वनस्पति, जीव - जन्तुऔ और मनुष्यों द्वारा उतसर्जित एवं मृत्यु के उपरांत कार्बनिक तत्वों का लघु जीवाणुओ द्वारा अपघटन होता है | ये असंख्य अति लघु जीवाणु अपना भोजन इससे ग्रहण करने के दौरान इसे अपघटित करते है जिससे कालांतर में ये कार्बनिक तत्व विघटित होकर अलग - अलग हो जाते है | खनिज तत्वों जैसे - फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, लोहा आदि में परिवर्तित होकर मृदा तथा जल में पहुंच जाते है जैसे बाद में वनस्पतियाँ अपने भोजन में प्रयोग करती है।इस प्रकार सम्पूर्ण पारस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का उत्त्पादन तथा क्रमिक संचरण होता रहता है जिससे सम्पूर्ण तंत्र की गतिशीलता बनी रहती है भौतिक कारक जल, मृदा, तापमान, वायु, खनिज तत्व आदि पारस्थितिक तंत्र की कार्य प्रणाली में उत्प्रेरक की रूप में कार्य करते है। ये सभी पारस्थितिक तंत्र के उत्पादन, उपभोग, एवं अपघटन की क्रिया को बढ़ा व घटा देते है।
पृथ्वी के तापमान में वृद्धि - का सबसे मह्त्वपूण कारण पर्दूषण में निरंन्तर वृद्धि है जिसको कारण हरित गृह गैस का स्तर बढ़ रहा है | और ओजोन परत का क्षय हो रहा है | इस कारण से अवशोषित सूर्य की मात्रा बढ़ जाती है | फलस्वरूप वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है |
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