GLOBAL WARMING
ग्लोबल वार्मिग --
विज्ञानं के कारण प्रौद्योगिकी का जन्म हुआ प्रौद्योगिकी के कारण हमे अनेक सुख सुबिधायें मिलीं परन्तु इसके कुछ दुष्परिणाम सामने आये है। प्रौद्योगिकी का एक ऐसा ही दुष्परिणाम ग्लोबल वार्मिंग है। ग्लोवल वार्मिग शब्द हिंदी भाषा में अंगेजी भाषा से आया है इसका अर्थ है सम्पूर्ण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होना। इसके कारण पृथ्वी के तापमान में असमांन्य वृद्धि होती है , जिससे सभी जीवित प्राणियों के जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
ग्लोबल वार्मिंग कैसे होती है --
हमारी पृथ्वी सौरमंडल का एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन सम्भव है। मूलतः जलवायु और जीवन के अनुकूल तापमान पृथ्वी पर जीवन की उतपत्ति के कारण मने जाते है। हमारी पृथ्वी पर परत है जो विभिन्न गैसों से मिलकर बनी है यह ओजोन नामक गैस से ढकी हुयी है ओजोन गैस सूर्य से आने वाली परबैगनी तथा अन्य हानिकारक किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। मावीय क्रियाओ द्वारा ओजोन गैस की परत धीरे - धीरे कम होती जा रही है , जिससे सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणे पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रही है। इसके फलस्वरूप पृथ्वी के तापमान में लगतरर वृद्धि हो रही है।
दुष्परिणाम -- पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्धि होना चिंत्ता का विषय है वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार , इससे ध्रुवों पर जमी वर्फ पिधल सकती है , जिससे समुद्र के जल स्तर में वृद्धि हो जाएगी। समुद्र के स्तर में वृद्धि होने से तटीय इलाकों में संकट की स्थिति पैदा हो जाएगी। यह भी संम्भव है की तटीय इलाके समुद्र में डूब जायें। ग्लोबल वार्मिग के कारण कई समुद्री तथा पृथ्वी पर रहने वाले जिव जन्तुओ की प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा छा गया है। ग्लोबल वार्मिग के कारण मनुष्य को स्वास्थ्य संबन्धी संमस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है।
बचाब एवं उपसंहार -- यदि समय रहते ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय नहीं किये गए , तो हमारी पृथ्वी जीवन के योग्य नहीं रहेगी इसे रोकने के लिए हमे प्रदूषण को रोखना होगा, जिससे ओजोन परत वनी रहे। इसके अतरिक्त हमे कार्बन डाइऑक्साइड सहित अन्य गैसों , जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है, इसकी उत्सर्जन मै कमी लानी होगी। इसके लिए सभी विकसित तथा विकाशशील देशों को आगे आना चाहिए। इन सबके साथ ही वृक्षारोपण को बढ़ाबा देना चाहिए , जिससे प्रकृति मै पर्यावरण संबंधी संतुलन बना रहे। हम सबको यह याद रखना चाहिए की इस कार्य की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति विशेष की नहीं है वरन सम्पूर्ण मानव जाती की है।
आज जो हालत है वो चिंता का विषय बने हुए हैं मगज जल्दी ही कोई कदम पर्यावरण के संरछण को लेकर नहीं उठाये तो बहुत ही भयानक हो सकती है इस में सम्पूर्ण मानव जाती को बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना होगा। हमे आशा है आप पर्यावरण बचने में अपना योगदान जरूर देंगे।
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